Sunday, February 5, 2012

रात नशा सा कुछ देखा था तेरी आँखों कि गहरी पनाह में अब उड़ गयी है मेरी खुशबू खिलते गुलों कि सुबह में मैं रहूँ कैसे तेरी निगाह में तेरी नज़र अब बागेय जहां में © Abha Iyengar, 29th January 2012
दर ब दर जान ही जाओगे तुम मुझे इतना अंजान न पाओगे तुम मुझे देखते हैं अच्छा लगता है कि नहीं समझना मुझे सुना है, ignorance is often bliss, my friend। (C) Abha Iyengar, 1st Feb, 2012
यह धूप फिर खिल रही है, लेकिन धीमी सी जाने क्या कह रही है छिप छिप के मुस्कराहट भरी है आज फिर यह सुबह दबी दबी खुद में लिपटी सी यह धूप हल्की सी , खुशी भरी, चारों ओर फैलती सी (C) Abha Iyengar, 3rd february, 2012
जब आँसू सूख गए,तुम पीने कि बात करते हो
जान कब कि निकाल गयी,तुम मरने कि बात करते हो
दुनिया से अलग हैं हम,तुम मिलने कि बात करते हो
हम सब कुछ ही छोड़ बैठे,तुम पाने कि बात करते हो
नफरत भरी दुनिया मेँ मुझसे मोहब्बत कि बात करते हो

~(C) आभा आयंगर , 23 जनवरी २०१२
आज की रात अनोखी है सिर्फ इस लिए
कि मालूम नहीं जागे हैं हम किस लिए
रिश्तो की बात न करना मुझसे कभी
बंधनो का जकड़ है कुछ तेज इस लिए
नींद भरी आँखें हैं बेचैन किस लिए
इंतज़ार की घड़ियाँ अभी बाक़ी है , इस लिए

(c) आभा आयंगर,१५ जनवरी २०१२
कुछ ख्वाब बुन रहें हैं हम सुबह सुबह
न जाने किस तरफ उठे हैं हम सुबह सुबह

~आभा आयंगर ४ फ़रवरी २०१२

Monday, January 23, 2012

अंजानों से बात करके तो देखो
अजब मिजाज मिलेंगे
अपनी सोच को पकड़ के न बैठो
दुनिया में दीवाने मिलेंगे

(C)~आभा आयंगर, जनवरी २०१२